
देश के प्रमुख पैरा एथलीटों में वरुण सिंह भाटी का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। नोएडा में 13 फरवरी 1995 को जन्मे वरुण ने मात्र छह माह की उम्र में पोलियो की चपेट में आकर एक पैर में स्थायी विकलांगता झेली। गलत दवा ने उनकी परेशानी को और गहरा किया, लेकिन परिवार का अटूट समर्थन ने उन्हें कभी हार मानने न दिया।
बचपन से खेलप्रिय वरुण ने बास्केटबॉल से शुरुआत की, लेकिन ऊंची कूद में करियर बनाने का फैसला लिया। सामान्य एथलीटों संग अभ्यास ने उन्हें प्रेरित किया। पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी सत्यनारायण की कोचिंग और गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन के सहयोग ने उनके T42 वर्ग करियर को नई दिशा दी।
2012 में 1.60 मीटर की कूद से लंदन पैरालंपिक के लिए योग्यता हासिल की, लेकिन सीमित स्थान के कारण हिस्सा न हो सके। 2014 में चाइना ओपन में स्वर्ण जीता। 2016 में आईपीसी एशिया-ओशिनिया में 1.82 मीटर से स्वर्ण और एशियाई रिकॉर्ड बनाया। रियो पैरालंपिक में 1.86 मीटर की सर्वश्रेष्ठ कूद से कांस्य पदक दिलाया।
2017 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य, 2018 एशियन पैरा गेम्स में रजत (1.82 मीटर)। 29 अगस्त 2018 को अर्जुन पुरस्कार से नवाजे गए। वरुण का संघर्षपूर्ण सफर लाखों को प्रेरित करता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई बाधा असंभव नहीं।