
भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर पर लगे बीसीसीआई पदाधिकारी बनने के प्रतिबंध को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब वे बोर्ड की सभी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले सकेंगे।
2017 में लोढ़ा समिति की सिफारिशों का पालन न करने के कारण ठाकुर को बीसीसीआई अध्यक्ष पद से हटाया गया था। उस समय तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर की बेंच ने उन्हें बोर्ड की आंतरिक बैठकों और कार्यों से दूर रहने का सख्त आदेश दिया था।
आज मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने उस फैसले में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया कि प्रतिबंध आजीवन अयोग्यता का प्रतीक नहीं था। ठाकुर की बिना शर्त माफी को अदालत ने स्वीकार किया, जिससे उनका रास्ता साफ हो गया।
यह फैसला बीसीसीआई के प्रशासनिक ढांचे को नई दिशा दे सकता है। आईपीएल, अंतरराष्ट्रीय मैचों और घरेलू क्रिकेट की तैयारियों के बीच ठाकुर का अनुभव उपयोगी साबित हो सकता है। राज्यों की क्रिकेट एसोसिएशनों में चुनाव और नीतिगत निर्णय प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सुधारों की भावना को बनाए रखते हुए न्यायसंगत है। अनुराग ठाकुर की वापसी से भारतीय क्रिकेट में नई ऊर्जा का संचार हो सकता है, जो खेल को और मजबूत बनाएगा।