
श्रीनगर की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अदालत ने जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) घोटाले के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट को गुरुवार को वापस ले लिया। यह फैसला कुछ घंटों पहले ही जारी वारंट के बाद आया, जब एक दिन पूर्व उन पर हुए जानलेवा हमले ने उनकी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया।
अदालत ने अब्दुल्ला को न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने के कारण वारंट जारी किया था। लेकिन उनके वकील इश्तियाक खान की याचिका पर विचार करते हुए कोर्ट ने फैसला उलट दिया। याचिका में बताया गया कि हमले के बाद मेडिकल विशेषज्ञों ने यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
खान ने कहा कि शारीरिक और मानसिक सदमे ने अब्दुल्ला की पहले से मौजूद बीमारियों—रक्तचाप में उतार-चढ़ाव और हृदय संबंधी समस्याओं—को बिगाड़ दिया है। जम्मू-श्रीनगर के बीच हवाई या सड़क यात्रा जानलेवा साबित हो सकती थी। सख्त निगरानी और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत उन्हें रखा गया है।
इससे पहले अदालत ने अब्दुल्ला और सहआरोपी मंजूर गजनफर अली की पेशी से छूट की मांग ठुकरा दी थी। सीबीआई ने फारूक अब्दुल्ला सहित अहसान अहमद मिर्जा, मोहम्मद सलीम खान और बशीर अहमद मिसगर पर करोड़ों के गबन का आरोप लगाते हुए चार्जशीट दाखिल की है।
जेकेसीए में क्रिकेट विकास के फंड के दुरुपयोग की जांच जारी है। यह कोर्ट का कदम मुकदमे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जो क्षेत्र की खेल संस्थाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करता है।