
2011 वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला श्रीलंका के खिलाफ भारत के लिए यादगार रहा। दूसरी ट्रॉफी जीतने का सपना साकार होने वाला था, लेकिन आशीष नेहरा की चोट ने पूरी टीम को हिलाकर रख दिया। ऐसे में 42 दिनों से मैदान से दूर श्रीसंत को अचानक मौका मिला, जो उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
केरल के इस तेज गेंदबाज का जन्म 6 फरवरी 1983 को हुआ। बचपन में लेग स्पिनर बनने का शौक था, लेकिन भाई की सलाह से पेसर बने। 2000 में पेस फाउंडेशन चयन और 2002 रणजी डेब्यू के बाद केरल के पहले टी-20 इंटरनेशनल खिलाड़ी बने।
दो वर्ल्ड कप जीतने वाली टीमों का हिस्सा रह चुके श्रीसंत को 2007 फाइनल के कैच के लिए जाना जाता है। लेकिन 2011 में बांग्लादेश हार के बाद बाहर हो चुके थे। नेहरा की चोट ने उन्हें वापस लाया।
श्रीसंत ने बताया कि सचिन ने नेट्स में बॉलिंग कराई और धोनी को सुझाया। मैच में कुछ ओवर के बाद घबराहट हुई, सांस फूल गई। सहवाग ने धमकाया, सचिन ने ड्रिंक ब्रेक में बुलाया। धोनी का संदेश सुनकर लौटे और ओवर डाले। भारत जीता।
विवादों ने करियर बर्बाद किया। 2013 स्पॉट फिक्सिंग से आजीवन बैन, बाद में बरी। 2021 में केरल के लिए वापसी, 2022 में घरेलू संन्यास। श्रीसंत की कहानी प्रेरणा है।