
भारतीय खेल इतिहास में 4 मार्च का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी तारीख को जन्मे टेनिस के दिग्गज रोहन बोपन्ना और उभरती बैडमिंटन सनसनी गायत्री गोपीचंद ने देश को गौरवान्वित किया है।
बेंगलुरु में 4 मार्च 1980 को पैदा हुए बोपन्ना ने 45 वर्ष की आयु में प्रोफेशनल टेनिस अलविदा कहा। 19 साल की उम्र से सफर शुरू कर 2007 में सानिया मिर्जा संग हॉपमैन कप में मिक्स्ड डबल्स उपविजेता बनकर चर्चा में आए।
ऐसेम-उल-हक कुरैशी के साथ ‘इंडो-पाक एक्सप्रेस’ ने 2010 विंबलडन क्वार्टरफाइनल और यूएस ओपन फाइनल तक पहुंचाया। तीन ओलंपिक (2012, 2016, 2024) में भागीदारी। 2017 फ्रेंच ओपन मिक्स्ड डबल्स खिताब गैब्रिएला डाब्रोवस्की संग।
2018 एशियन गेम्स में दिविज शरण संग गोल्ड। 43 की उम्र में एटीपी मास्टर्स सबसे बुजुर्ग विजेता, मियामी ओपन 2024, ऑस्ट्रेलियन ओपन 2024 मेंस डबल्स में सबसे उम्रदराज ग्रैंड स्लैम चैंपियन और डबल्स वर्ल्ड नंबर-1।
4 मार्च 2003 को पुलेला गोपीचंद-पवी लक्ष्मी के घर गायत्री का जन्म। बैडमिंटन घराना। भाई साई विष्णु संग ट्रेनिंग। जूनियर वर्ल्ड 2017 में प्री-क्वार्टर, 15 साल में अंडर-17 नंबर-1 और 2018 एशियन गेम्स सबसे युवा शटलर।
2019 सीनियर डेब्यू, साउथ एशियन गेम्स गोल्ड। पोलिश इंटरनेशनल 2021 उपविजेता। कॉमनवेल्थ 2023 में मिक्स्ड टीम सिल्वर, विमेंस डबल्स ब्रॉन्ज। एशियन टीम चैंपियनशिप गोल्ड।
बोपन्ना का संन्यास और गायत्री का उदय 4 मार्च को भारतीय खेलों की नई ऊंचाइयों का प्रतीक है।