
भारतीय निशानेबाजी की दुनिया में मनु भाकर का नाम एक मिसाल बन चुका है। हरियाणा के झज्जर में 18 फरवरी 2002 को जन्मीं मनु ने अपनी साहसी शुरुआत से लेकर ओलंपिक सफलता तक का सफर तय किया है। मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर पिता राम किशन भाकर और मां सुमेधा ने उन्हें झांसी की रानी के बचपन के नाम ‘मनु’ से नवाजा, ताकि बेटी निडर बने।
स्कूल के दिनों में मनु ने टेनिस, बॉक्सिंग, स्केटिंग और थान टा में राष्ट्रीय पदक जीते। लेकिन 14 साल की उम्र में रियो ओलंपिक 2016 के बाद उन्होंने शूटिंग चुनी। पिता से पिस्टल मांग ली, जो एक हफ्ते में मिल गई। कड़ी मेहनत का इनाम 2017 नेशनल चैंपियनशिप में मिला, जहां 10 मीटर एयर पिस्टल फाइनल में हीना सिद्धू को हराकर 242.3 का रिकॉर्ड बनाया। एशियन जूनियर में सिल्वर भी जीता।
16 साल की उम्र में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप मिक्स्ड डबल्स में गोल्ड से सबसे युवा भारतीय बनीं। केरल नेशनल्स में नौ गोल्ड और नया रिकॉर्ड। कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में रिकॉर्ड तोड़ गोल्ड। टोक्यो 2020 में निराशा मिली, लेकिन 2021 वर्ल्ड कप में गोल्ड-ब्रॉन्ज, 2022 वर्ल्ड चैंपियनशिप सिल्वर, 2023 एशियन गेम्स गोल्ड ने वापसी कराई।
पेरिस 2024 में दो ब्रॉन्ज—10 मीटर एयर पिस्टल और मिक्स्ड टीम—से एक ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। खेल रत्न 2024 और अर्जुन 2020 से सम्मानित। मनु की कहानी साहस, लगन और सफलता की प्रेरणा है।