
नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुके दिग्गज मुक्केबाज मनोज कुमार ने बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीएफआई) के नए मूल्यांकन नियमों की पारदर्शिता पर कड़ी चोट की है। 2026 कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स के लिए मुक्केबाजों के चयन के इस सिस्टम में पुराने खिलाड़ियों, अर्जुन अवॉर्डियों, द्रोणाचार्य अवॉर्डियों और ओलंपियन को मॉनिटरिंग में शामिल न करने पर उन्होंने सवाल उठाए हैं।
मनोज ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि चयन प्रक्रिया मुख्य कोच, जजों और फेडरेशन तक सीमित है। उन्होंने पूछा कि अनुभवी नाम जैसे विजेंदर सिंह और अखिल कुमार को पर्यवेक्षक क्यों नहीं बनाया गया? इससे प्रक्रिया में भरोसा बढ़ता और खिलाड़ी सुरक्षित महसूस करते।
बीएफआई ने एनएस एनआईएस पटियाला में 13 से 15 मई तक चलने वाले एलीट नेशनल कैंप के लिए यह नया नियम लागू किया है। इसमें 5 जजों की स्कोरिंग सिस्टम अपनाई जाएगी, जिसमें हर स्पैरिंग बाउट के बाद तुरंत स्कोर घोषित होगा। पुराना मार्किंग सिस्टम खत्म, साथ ही स्ट्रेंथ-कंडीशनिंग टेस्ट, स्पोर्ट्स साइंस, वजन प्रबंधन आदि के पुराने स्कोर रद्द।
बीएफआई सचिव प्रमोद कुमार ने कहा कि कॉमनवेल्थ, एशियन गेम्स आदि के चयन इसी कैंप पर आधारित होंगे। मनोज का यह बयान भारतीय मुक्केबाजी में पारदर्शिता की पुरानी बहस को फिर हवा देता है। यदि फेडरेशन ने दिग्गजों को शामिल किया होता, तो विवाद कम होता। अब कैंप के नतीजे तय करेंगे कि नया सिस्टम कितना प्रभावी साबित होता है। भारतीय मुक्केबाजी को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा।
