
भारतीय तीरंदाजी के इतिहास में जयंता तालुकदार का नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। 2 मार्च 1986 को गुवाहाटी, असम में जन्मे इस धुरंधर ने कम उम्र से ही तीरंदाजी में रुचि दिखाई। असम की जनजातीय संस्कृति में तीरंदाजी की गहरी जड़ें हैं, जिन्होंने जयंता को प्रेरित किया। कड़ी मेहनत से उन्होंने जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
2004 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में भारतीय टीम के साथ रजत पदक जीतकर उन्होंने शुरुआती सफलता हासिल की। 2006 में एफआईटीए मेटेकसन विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतकर वे पहले भारतीय बने। उसी वर्ष साउथ एशियन गेम्स में स्वर्ण और एशियाई खेलों में टीम कांस्य ने उनकी प्रतिभा को प्रमाणित किया।
21 जून 2012 को लंदन ओलंपिक में पुरुष रिकर्व व्यक्तिगत व टीम स्पर्धा में भाग लिया। व्यक्तिगत में पहले दौर में जैकब वूकी से हार, जबकि टीम जापान से रही। 2015 में दीपिका कुमारी संग एशियाई चैंपियनशिप के मिक्स्ड टीम में कांस्य जीता।
जयंता ने तीरंदाजी को भारत में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। 2007 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हुए। असम सरकार ने उन्हें पुलिस उपाधीक्षक बनाया। उनकी कहानी प्रेरणा का स्रोत है, जो कठिनाइयों पर विजय पाने की मिसाल है।