
भारतीय क्रिकेट के सुनहरे पन्नों में गुंडप्पा विश्वनाथ का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। 12 फरवरी 1949 को मैसूर में जन्मे इस बल्लेबाज ने अपने पहले ही टेस्ट मैच में शतक जड़कर इतिहास रच दिया। खास बात यह रही कि उनके करियर में जितने भी शतक आए, भारत उन मुकाबलों में कभी नहीं हारा।
घरेलू क्रिकेट में 1967-68 में आंध्र के खिलाफ दोहरा शतक लगाकर उन्होंने राष्ट्रीय टीम में जगह पाई। नवंबर 1969 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेब्यू में पहली पारी में शून्य पर आउट होने के बाद दूसरी पारी में 137 रनों की पारी खेली।
विश्वनाथ मैच से पहले कभी नेट पर प्रैक्टिस नहीं करते थे, ऊर्जा बचाने के लिए। 91 टेस्ट में 6080 रन, 41.93 औसत और 14 शतक। सभी प्रमुख टीमों के खिलाफ सेंचुरी लगाने वाले पहले भारतीय। चार जीत, दस ड्रॉ।
13 वनडे में 439 रन। 1983 में टेस्ट संन्यास। बाद में आईसीसी रेफरी, चयनकर्ता बने। 1977 में अर्जुन अवॉर्ड। उनका योगदान आज भी प्रेरणा स्रोत है।