
तेलंगाना के निजामाबाद में 12 फरवरी 1994 को जन्मे मोहम्मद हुसामुद्दीन का जीवन खेलों से रंगा हुआ है। उनके पिता मोहम्मद शम्सुद्दीन न केवल पूर्व मुक्केबाज हैं बल्कि निखत जरीन जैसे सितारों के कोच भी। घर में चार भाइयों के मुक्केबाजी खेलने से माहौल ऐसा था कि पिता की जिम्नास्टिक की इच्छा के बावजूद हुसामुद्दीन रिंग में उतर आए।
56-57 किलो वर्ग में उन्होंने नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल ओपन में कांस्य जीता। 2018 गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों और 2022 बर्मिंघम में भी कांस्य पदक हासिल किए। सर्विसेज टीम से राष्ट्रीय चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण और एक रजत उनके नाम हैं।
2023 के अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित 32 वर्षीय हुसामुद्दीन अपनी तकनीक, मेहनत और अनुशासन के लिए मशहूर हैं। उनकी कहानी भारतीय मुक्केबाजी की उभरती ताकत को दर्शाती है, जो युवाओं को प्रेरित कर रही है।