
इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने ‘द हंड्रेड’ टूर्नामेंट की नीलामी से जुड़ी उन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि भारतीय मालिकों वाली टीमें पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नजरअंदाज करेंगी। यह विवाद तब भड़का जब खबरें आईं कि चार फ्रेंचाइजी—मैनचेस्टर सुपर जायंट्स, एमआई लंदन, सदर्न ब्रेव और सनराइजर्स लीड्स—नीलामी में 67 पाकिस्तानी क्रिकेटरों (63 पुरुष, 4 महिला) को दरकिनार कर सकती हैं।
मंगलवार को ईसीबी और आठों टीमों ने संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट किया कि भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं। ‘द हंड्रेड का मकसद नए दर्शकों को जोड़ना, क्रिकेट को बढ़ावा देना और हर जाति, धर्म, लिंग या राष्ट्रीयता के व्यक्ति को शामिल महसूस कराना है। खिलाड़ियों का चयन सिर्फ प्रदर्शन, उपलब्धता और टीम जरूरतों पर आधारित होगा।’
बयान में कहा गया कि किसी भी भेदभावपूर्ण व्यवहार पर सख्त कार्रवाई होगी। 2008 के बाद आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ी न खेलने की पृष्ठभूमि में ‘द हंड्रेड’ में भी उनकी भागीदारी सीमित रही—पिछले पांच सीजनों में महज नौ खिलाड़ी। ईसीबी की यह पहल टूर्नामेंट को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नीलामी अगले महीने होगी, और अब उम्मीद है कि पाकिस्तानी सितारे भरपूर मौके पाएं।