
भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम दौर के एक प्रमुख स्तंभ दत्ताजी राव गायकवाड़ अब हमारे बीच नहीं रहे। 27 अक्टूबर 1928 को बड़ौदा में जन्मे इस दाएं हाथ के बल्लेबाज और ऑफस्पिनर ने 1950-60 के दशक में देश का प्रतिनिधित्व किया। उनकी कवर ड्राइव विपक्षी गेंदबाजों के लिए सिरदर्द साबित होती थी।
घरेलू क्रिकेट में बड़ौदा के लिए 1947 से 1961 तक खेलते हुए उन्होंने 3139 रन बनाए, जिसमें 14 शतक शामिल हैं। 1959-60 में महाराष्ट्र के खिलाफ नाबाद 249 रन की पारी उनके करियर का यादगार पल है। इसी दौरान दो डबल सेंचुरी भी जड़ीं। उनकी कप्तानी में बड़ौदा ने 1957-58 में रणजी ट्रॉफी पर पहला खिताब हासिल किया।
अंतरराष्ट्रीय पटल पर जून 1952 में डेब्यू करने वाले गायकवाड़ ने 11 टेस्ट खेले। 1959 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 52 रन की पारी से वापसी की, फिर 58, 64, 33, 5 और 26 रन बनाए। इंग्लैंड दौरे पर चार टेस्ट में कप्तानी की, जहां 128 रन जोड़े।
पिता की तरह बेटे अंशुमान गायकवाड़ ने भी भारत के लिए 40 टेस्ट और 15 वनडे खेले। 13 फरवरी 2024 को 95 वर्ष की आयु में दुनिया छोड़ने वाले गायकवाड़ का योगदान भारतीय क्रिकेट की नींव में बसा रहेगा। उनकी शानदार तकनीक और नेतृत्व आज भी प्रेरणा स्रोत है।