
उत्तर प्रदेश में तपेदिक (टीबी) के खिलाफ एक नया युद्ध छेड़ने जा रही है योगी आदित्यनाथ सरकार। फरवरी से शुरू हो रहे 100 दिवसीय विशेष सघन टीबी रोगी खोज अभियान से राज्य भर में छिपे मरीजों का पता लगाया जाएगा। यह अभियान राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम का हिस्सा है और 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।
अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता, एएनएम, स्वास्थ्य कर्मी और स्थानीय प्रशासन मिलकर घर-घर जाकर जांच करेंगे। मोबाइल एक्सरे यूनिट, जीनएक्सपर्ट मशीन और रैपिड टेस्ट किट्स का व्यापक उपयोग होगा। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी झुग्गी-झोपड़ियों तक कोई कोना नहीं बचेगा।
स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, ‘टीबी आज भी चुपके से लोगों की जान ले रही है। इस अभियान से लाखों मरीजों की पहचान होगी और मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जाएगा।’ पिछले वर्ष प्रदेश में 1.8 लाख से अधिक मामले दर्ज हुए थे, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या कहीं अधिक है।
जागरूकता के लिए स्कूलों में कार्यक्रम, बाजारों में रैलियां और कार्यस्थलों पर जांच शिविर आयोजित होंगे। लक्षणों जैसे लगातार खांसी, वजन घटना, रात में पसीना आना पर तत्काल जांच की अपील की जा रही है।
पायलट प्रोजेक्ट्स में 30 प्रतिशत अधिक मरीज मिले हैं। 500 करोड़ रुपये का बजट, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन राशि से अभियान को गति मिलेगी।
प्रदेशवासी सक्रिय भागीदारी करें। जल्दी पता चले तो टीबी आसानी से ठीक हो जाता है। योगी सरकार का यह संकल्प टीबी को जड़ से उखाड़ फेंकेगा।