
सर्दियों का मौसम आते ही कई लोगों को हल्की चलने पर सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। इसे मौसम की मार समझकर नजरअंदाज न करें, क्योंकि ये छोटा लक्षण बड़ी बीमारियों की चेतावनी हो सकता है।
हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि ठंडे मौसम में रक्तनलियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। धमनियों में जमे प्लाक के कारण कोलेस्ट्रॉल ब्लॉकेज वाले मरीजों में एंजाइना या हार्ट फेलियर के लक्षण प्रकट होते हैं।
फेफड़ों के डॉक्टर बताते हैं कि सीओपीडी, अस्थमा और फेफड़ों में हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां सर्दी में बिगड़ जाती हैं। सूखी हवा और प्रदूषण से सांस की नलियां सूज जाती हैं।
दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों के बड़े अस्पतालों में नवंबर-फरवरी के बीच सांस की तकलीफ के केस 40 प्रतिशत बढ़ जाते हैं। 50 साल से अधिक उम्र, धूम्रपान, मोटापा और बैठे रहने वाले लोग सबसे ज्यादा खतरे में हैं।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें। छाती में जकड़न, पैरों में सूजन या लगातार थकान के साथ सांस फूलना तुरंत जांच का संकेत है। ईसीजी, फेफड़ा फंक्शन टेस्ट और इकोकार्डियोग्राम से छिपी समस्याएं पकड़ में आ जाती हैं।
रोकथाम के उपाय अपनाएं। गर्म कपड़े पहनें, भाप लें, गुनगुने पानी से हाइड्रेटेड रहें। हल्की घरेलू एक्सरसाइज करें। सबसे जरूरी है – अपने शरीर की सुनें। ये सांस फूलना समय पर इलाज कराने का संकेत दे रहा है।
सर्दियां बीमारियों का मौसम नहीं, सतर्कता का मौसम है। आज जांच करवाएं, कल सांस लेने की आजादी पाएं।