
सर्द हवाओं का मौसम आते ही पैरों की स्किन रूखी हो जाती है। दरारें, दर्द और सूजन आम समस्याएं बन जाती हैं। आयुर्वेद में पैरों को शरीर का आधार माना गया है, जो ऊर्जा बिंदुओं से जुड़े हैं।
वात दोष की अधिकता से रूखापन बढ़ता है, जो जोड़ों के दर्द और रक्त संचार बाधित कर सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि अनदेखी घातक संक्रमणों को न्योता देती है।
रोज रात तिल के तेल से मालिश करें। गुनगुने पानी में सेंधा नमक डालकर भिगोएं। घी युक्त भोजन, बादाम और गर्म सूप लें। नीम का लेप दरारें भरता है।
एलोवेरा या मुलेठी से स्पा बनाएं। ओस भरी घास पर नंगे पैर चलें। ये उपाय न केवल पैर नरम रखेंगे, बल्कि समग्र स्वास्थ्य सुधारेंगे।
सर्दी में पैरों को प्राथमिकता दें। आयुर्वेद की ये विद्या आपको स्वस्थ रखेगी।