
आज की अनिश्चित आर्थिक दुनिया में अचानक आने वाली मुश्किलें किसी को भी हिला सकती हैं। नौकरी चली जाना, बीमारी या वाहन खराब होना—ऐसी स्थितियों में इमरजेंसी फंड आपका सबसे मजबूत सहारा बन जाता है।
इमरजेंसी फंड एक ऐसी राशि है जो विशेष रूप से अप्रत्याशित खर्चों के लिए अलग रखी जाती है। वित्तीय विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसमें कम से कम 3 से 6 महीने के जीवनयापन खर्च होने चाहिए। यह छुट्टियों, नए सामान या आवेगी खरीदारी के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक संकटों के लिए है।
यह क्यों जरूरी है? क्योंकि जिंदगी की मुसीबतें पहले से सूचना नहीं देतीं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की एक रिपोर्ट के अनुसार, 40 प्रतिशत लोग $400 के आपात खर्च को भी कर्ज लेकर ही पूरा कर पाते हैं। बिना फंड के लोग महंगे क्रेडिट कार्ड या लोन की ओर भागते हैं, जो कर्ज के जाल में फंसाते हैं।
अपना फंड कैसे बनाएं? सबसे पहले मासिक जरूरी खर्चों की गणना करें—किराया, बिजली, भोजन, बीमा और न्यूनतम कर्ज चुकौती। इसे 3-6 से गुणा करें। अस्थिर नौकरी वाले अधिक रखें।
इसे कहां रखें? हाई-यील्ड सेविंग्स अकाउंट सबसे अच्छा—तुरंत निकासी संभव, सुरक्षित और ब्याज कमाने वाला। शेयर बाजार या रिटायरमेंट फंड से दूर रहें।
अनुशासन जरूरी है। वेतन मिलते ही ऑटोमेटिक ट्रांसफर सेट करें। गैर-आपात खरीदारी के लिए इस्तेमाल न करें। पूछें: क्या यह 5 साल बाद मायने रखेगा?
हाल की महंगाई और बेरोजगारी ने इसकी अहमियत और बढ़ा दी है। जो लोग तैयार थे, वे सुरक्षित रहे। छोटे से शुरू करें—₹20,000 से। निरंतरता सफलता की कुंजी है। अपनी आर्थिक आजादी खुद सुनिश्चित करें।