
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में प्यास बुझाना ही काफी नहीं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि पानी की कमी शरीर के अंदरूनी अंगों को चुपचाप नष्ट कर रही है। किडनी स्टोन से लेकर दिमागी कमजोरी तक, यह हर उम्र के लिए खतरा बन चुकी है।
गर्मियों में डॉक्टरों के पास हीट स्ट्रोक के मरीजों की भरमार है। ‘लोग हल्की प्यास को नजरअंदाज करते हैं, जो भयानक बीमारियों को जन्म देती है,’ कहते हैं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. राजेश कुमार। शरीर का 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना है, जो बिना इसके ठप हो जाता है।
किडनी सबसे पहले प्रभावित होती है। कम पानी से यूरिन गाढ़ा होकर पथरी और इंफेक्शन पैदा करता है। दिल पर दबाव पड़ता है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है। दिमाग सुस्त पड़ जाता है – एकाग्रता, याददाश्त सब प्रभावित।
शहरी जीवनशैली ने हालात बिगाड़े हैं। एसी के कमरों में पसीना सूख जाता है, कोल्ड ड्रिंक्स पानी की जगह ले लेते हैं। गांवों में संकट गहरा है, गंदे पानी पर निर्भरता। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 60 करोड़ भारतीयों को सालाना पानी की भारी किल्लत।
समाधान आसान: रोज 3-4 लीटर पानी पिएं। खीरा, तरबूज जैसे फल खाएं। यूरिन का रंग हल्का पीला रखें। परिवार में फिल्टर लगवाएं, उबला पानी स्टोर करें।
जलवायु परिवर्तन से संकट बढ़ेगा, इसलिए अभी जागें। प्यास का इंतजार न करें, पानी को साथी बनाएं। यह स्वास्थ्य क्रांति का समय है।