
अगले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की पूरी संभावना है, क्योंकि अमेरिकी टैरिफ नीतियों को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। वैश्विक व्यापार तनाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी की चाल कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक प्रमुख आकर्षण रहेगी। मुद्रास्फीति अभी भी लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है, इसलिए ब्याज दरों में कोई बदलाव की उम्मीद कम है। लेकिन नीति पर कोई सख्त रुख अपनाने से बिकवाली तेज हो सकती है।
कॉर्पोरेट तिमाही नतीजे भी सुर्खियों में रहेंगे। एचडीएफसी बैंक, रिलायंस और टीसीएस जैसे दिग्गजों के आंकड़े बाजार की मनोदशा तय करेंगे। आईटी और बैंकिंग क्षेत्र पर विशेष नजर रहेगी।
विदेशी संकेत महत्वपूर्ण होंगे। फेड के संकेतों से डॉलर मजबूत हुआ है, जो उभरते बाजारों पर दबाव डाल रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ऊर्जा शेयरों को प्रभावित करेगा।
एफआईआई प्रवाह फिर से सकारात्मक हो गया है, जो कुछ राहत दे रहा है। सरकारी व्यय से इंफ्रास्ट्रक्चर और धातु क्षेत्रों को समर्थन मिल रहा है।
तकनीकी रूप से निफ्टी 24,000 के सपोर्ट पर टिका है। ऊपर 24,500 का प्रतिरोध महत्वपूर्ण होगा। डेरिवेटिव डेटा से बचाव की रणनीति झलक रही है।
बैंकिंग और आईटी में सतर्क रहें, जबकि एफएमसीजी और फार्मा सुरक्षित दांव हो सकते हैं। अमेरिका-चीन व्यापार खबरों पर नजर रखें।
कुल मिलाकर घरेलू मजबूती है, लेकिन बाहरी जोखिम प्रमुख हैं। डिप्स पर चयनात्मक खरीदारी सही रणनीति होगी।