
लंदन में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव जोर पकड़ रहा है। ब्रिटेन की सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है। यह कदम ऑस्ट्रेलिया के हालिया सख्त नियमों से प्रेरित है, जहां बच्चों को डिजिटल खतरों से बचाने के लिए कड़े उपाय अपनाए गए हैं।
हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि इंस्टाग्राम, टिकटॉक जैसी साइट्स युवाओं में चिंता, अवसाद और साइबरबुलिंग की समस्या को बढ़ावा दे रही हैं। एनएचएस के आंकड़े बताते हैं कि किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की अगुवाई वाली सरकार ने संसद में इस मुद्दे पर तेज चर्चा शुरू कर दी है।
ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल उम्र सत्यापन तकनीक लागू की, जिसमें डिजिटल आईडी और चेहरे की पहचान शामिल है। ब्रिटेन भी इसी मॉडल को अपनाने की तैयारी में है, जिसमें 2025 तक बायोमेट्रिक जांच या अभिभावकों की सहमति अनिवार्य हो सकती है।
टेक कंपनियां और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थक इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह निजता का उल्लंघन है। लेकिन जनमत सर्वे में 70 प्रतिशत अभिभावक प्रतिबंध के पक्ष में हैं।
यह फैसला बच्चों के भविष्य को आकार देगा। क्या ब्रिटेन डिजिटल दुनिया में माता-पिता की चिंताओं को प्राथमिकता देगा?