
ओलंपिक इतिहास के पन्नों में रस्साकशी एक ऐसा खेल है जो कच्ची ताकत और टीमवर्क का प्रतीक रहा। योद्धाओं के प्रशिक्षण से निकला यह खेल 1900 से 1920 तक पांच लगातार ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों का हिस्सा बना। अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्विता ने इसे विश्व पटल पर चमकाया।
प्राचीन सैनिकों की क्रूर परीक्षा से विकसित होकर 19वीं सदी के अंत में औपचारिक खेल बना। 1900 पेरिस ओलंपिक में पहली बार शामिल हुआ। आठ सदस्यीय टीमें एक रेखा पर खिंचतान करतीं, जहां तकनीक मांसपेशियों से ऊपर थी। ब्रिटेन ने 1908 और 1920 में स्वर्ण जीता, अमेरिका व स्वीडन ने भी कमाल दिखाया।
1904 सेंट लुइस में अमेरिकी टीमों ने मेडल्स लूटे। 1908 लंदन में भीड़ झूम उठी जब सिटी ऑफ लंदन पुलिस ने प्रतिद्वंद्वियों को हराया। 1920 एंटवर्प में युद्धोत्तर खुशी के बीच ब्रिटेन ने ताज बचाया। हर खिंचाव सहनशक्ति, रणनीति व टीम भावना की परीक्षा था।
1920 के बाद क्यों गायब? व्यक्तिगत खेलों को प्राथमिकता और वजन वर्ग विवादों से शुद्धता प्रभावित हुई। आज विश्व चैंपियनशिप्स में जोश बरकरार। पेरिस 2024 से पहले इसकी वापसी की चर्चा तेज।
रस्साकशी सिखाती है- जीत एकता से मिलती है। एकल सितारों के दौर में यह टीम भाव प्रेरणा बनता रहेगा।