
भारत के वस्त्र क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए वस्त्र मंत्रालय ने 15 राज्यों के साथ महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया है, जो उद्योग की चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान देगा।
उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य इस साझेदारी का हिस्सा हैं। इन समझौतों के तहत राज्यों में विशेष अनुसंधान केंद्र स्थापित होंगे, जो उत्पादन, रोजगार, निर्यात और बाजार रुझानों पर वास्तविक डेटा एकत्र करेंगे।
मंत्रालय इन केंद्रों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और वित्तीय मदद देगा। इससे हथकरघा पुनरुद्धार, सतत विनिर्माण और तकनीकी वस्त्रों जैसे क्षेत्रों में नीतियां प्रभावी होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वस्त्र उद्योग के जीडीपी योगदान को बढ़ाएगा, जो वर्तमान में लगभग 2 प्रतिशत है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप, यह निर्यात लक्ष्यों को भी गति देगा।
उद्योग संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया है। आने वाले महीनों में और अधिक राज्यों को जोड़ने की योजना है। राष्ट्रीय स्तर पर डेटा डैशबोर्ड विकसित होगा, जो नीति निर्माण को और पारदर्शी बनाएगा।
यह साझेदारी न केवल वस्त्र क्षेत्र बल्कि अन्य उद्योगों के लिए भी मॉडल बनेगी, जहां डेटा निर्णयों का आधार बनेगा।