
2025 में वैश्विक संकटों के बावजूद भारत का शेयर बाजार चमत्कारिक प्रदर्शन कर रहा है। भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार युद्धों और आर्थिक उथल-पुथल के बीच इक्विटी निवेशकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट से कहीं अधिक रिटर्न हासिल किया।
साल की शुरुआत ही मुश्किलों भरी थी। रूस-यूक्रेन संघर्ष ने ऊर्जा संकट पैदा किया, अमेरिका-चीन व्यापार विवादों ने सप्लाई चेन बाधित कीं। महंगाई आसमान छू रही थी, सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ा रहे थे। फिर भी बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 ने 14-16 प्रतिशतのリターン दिए।
वहीं एफडी रेट्स 7.5 प्रतिशत तक पहुंचकर लुढ़क गए। वित्तीय विशेषज्ञ राजेश मेहता कहते हैं, ‘मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था ने बाजार को सहारा दिया।’ कंपनियों की कमाई बढ़ी, उपभोग और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च ने गति दी।
आईटी, बैंकिंग सेक्टर आगे रहे। इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक जैसे स्टॉक्स ने डबल डिजिट रिटर्न दिए। वैश्विक बाजार गिरे, लेकिन भारत में एफआईआई ने डिप्स में खरीदारी की।
यह प्रदर्शन सिखाता है कि लंबी अवधि का निवेश अस्थिरता में भी फायदेमंद है। 2026 में भी बेहतर संभावनाएं हैं। निवेशक सतर्क रहें, एफडी से हटकर इक्विटी चुनें।