
शेयर बाजार में निवेश करते समय डिविडेंड, बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट जैसे शब्द अक्सर सुनने को मिलते हैं। ये कॉर्पोरेट एक्शन न केवल कंपनी की सेहत दर्शाते हैं, बल्कि निवेशकों के पोर्टफोलियो को सीधे प्रभावित करते हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझें।
डिविडेंड कंपनी के मुनाफे का हिस्सा होता है जो शेयरधारकों को नकद या शेयरों के रूप में मिलता है। मान लीजिए एक कंपनी ₹5 प्रति शेयर डिविडेंड घोषित करती है, तो आपके पास जितने शेयर, उतना ही लाभ। एक्स-डिविडेंड तारीख पर शेयर की कीमत उतनी ही गिर जाती है, लेकिन कुल संपत्ति वही रहती है।
बोनस इश्यू मौजूदा शेयरधारकों को मुफ्त शेयर देने का तरीका है। जैसे 1:1 बोनस में एक शेयर पर एक अतिरिक्त मिलता है। कंपनी के रिजर्व से फंडेड, ये शेयरों की संख्या बढ़ाते हैं बिना वैल्यू घटाए। ₹1000 वाले शेयर ₹500 हो सकते हैं, लेकिन कुल मूल्य समान।
स्टॉक स्प्लिट शेयरों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटता है। 2:1 स्प्लिट में एक शेयर दो हो जाते हैं, कीमत आधी। इससे लिक्विडिटी बढ़ती है और छोटे निवेशक आकर्षित होते हैं। ऐपल जैसी कंपनियां बार-बार स्प्लिट करती रही हैं।
निवेशक इनकी घोषणाओं पर नजर रखें। टैक्स नियम जानें—डिविडेंड पर टैक्स लगता है, बोनस-स्प्लिट पर नहीं। ये घटनाएं अक्सर शेयरों में तेजी लाती हैं। सही समय पर निवेश करें, बाजार की इस पाठशाला से सीखें और लाभ कमाएं।