
भारत के छोटे-छोटे शहरों और कस्बों में उद्यमिता की लहर चल पड़ी है। स्टार्टअप इंडिया जैसी सरकारी योजनाओं ने इन इलाकों के कारोबारियों को नई उड़ान दी है। स्टार्टअप फाउंडर्स का कहना है कि ये पहल न केवल फंडिंग मुहैया करा रही हैं, बल्कि मेंटरशिप और बाजार तक पहुंच भी सुनिश्चित कर रही हैं।
लखनऊ में आयोजित एक सम्मेलन में कई फाउंडर्स ने अपने अनुभव साझा किए। कानपुर की प्रिया शर्मा ने कृषि-तकनीक स्टार्टअप शुरू किया। स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम से उन्हें शुरुआती पूंजी मिली। ‘पहले बैंक हमें जोखिम भरा मानते थे, अब हम उत्तर प्रदेश में विस्तार कर रहे हैं,’ उन्होंने कहा।
आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत अटल इनोवेशन मिशन ने 100 से अधिक जिलों में इंक्यूबेटर स्थापित किए हैं। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के आंकड़ों के अनुसार, मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में 45 प्रतिशत गैर-महानगरों से हैं।
जयपुर के रोहन मेहता की एडटेक कंपनी ने टैक्स छूट का लाभ उठाया। ‘कागजी कार्रवाई 70 प्रतिशत कम हुई, हम इनोवेशन पर ध्यान दे सके,’ उन्होंने बताया। फंड ऑफ फंड्स ने 10,000 करोड़ रुपये निवेश किया है।
चुनौतियां बरकरार हैं, जैसे जागरूकता की कमी और बुनियादी ढांचे का अभाव। फिर भी, फाउंडर्स आशावादी हैं। एक ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में छोटे शहरों की भूमिका बढ़ रही है। ये कहानियां साबित करती हैं कि उद्यमशीलता की कोई सीमा नहीं।