
नई दिल्ली: 2016 में शुरू हुए ‘स्टार्टअप इंडिया’ अभियान ने दस वर्षों में भारत के उद्यमिता परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। मात्र चार यूनिकॉर्न से शुरू होकर आज 120 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियां इसकी सफलता की गवाही दे रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित यह पहल टैक्स छूट, सरलीकृत नियमों और 10,000 करोड़ के फंड ऑफ फंड्स लेकर आई। नतीजा? वेंचर कैपिटल में अरबों डॉलर का निवेश और देशभर में 1.2 लाख स्टार्टअप्स का उदय।
फिनटेक से एडटेक तक, पेटीएम से बायजूज तक—हर क्षेत्र में क्रांति हुई। महिलाओं के लिए विशेष योजनाओं ने उनके नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया। इंक्यूबेटर्स ने 50,000 से ज्यादा उद्यमियों को प्रशिक्षित किया।
चुनौतियां रहीं—विनियमन की जटिलताएं, महामारी का असर—लेकिन डिजिटल गोद लेने से रफ्तार बनी रही। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब है।
भविष्य में ग्लोबल साझेदारियां और डीप टेक पर फोकस रहेगा। यह दस साल भारत के उद्यमी स्वप्न को साकार करने की मिसाल हैं।