
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनिद्रा, माइग्रेन और तनाव आम समस्याएं बन गई हैं। आयुर्वेद का शिरोधारा चिकित्सा इनसे निजात दिलाने में बेहद असरदार साबित हो रही है। इस थेरेपी में माथे पर गुनगुने औषधीय तेल की धारा गिराई जाती है, जो तंत्रिका तंत्र को शांत करती है।
हजारों वर्ष पुरानी यह विद्या ‘शिर’ (सिर) और ‘धारा’ (प्रवाह) से बनी है। शोध बताते हैं कि यह कोर्टिसोल हार्मोन को कम कर नींद की गुणवत्ता 70 प्रतिशत सुधारती है। माइग्रेन पीड़ितों में सिरदर्द की तीव्रता घटती है।
30-45 मिनट की प्रक्रिया में रोगी शांत भाव से लेटता है। तेल का प्रवाह पिट्यूटरी ग्रंथि सक्रिय कर हार्मोन संतुलित करता है। तनावग्रस्त लोग गहरी विश्रांति पाते हैं।
विशेषज्ञ 7-14 सत्र सलाह देते हैं। प्रसिद्ध हस्तियां इसे अपनाती हैं। सावधानी: त्वचा एलर्जी वाले चिकित्सक से परामर्श लें। प्राकृतिक उपचार की यह कला जीवन को नई ऊर्जा देती है।