
बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) का मार्केट कैपिटलाइजेशन एक ही दिन में 95,407 करोड़ रुपये की भारी कमी के साथ धराशायी हो गया। जून 2024 के बाद स्टॉक में यह सबसे बड़ी एकल दिवसीय गिरावट है।
आरआईएल के शेयरों में 5.2 प्रतिशत की जोरदार गिरावट आई और यह 2,700 रुपये के आसपास बंद हुआ। निफ्टी 50 सूचकांक में 1.2 प्रतिशत की कमी देखी गई, लेकिन रिलायंस ने बाजार को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया।
इस गिरावट के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज नरमी ने रिफाइनिंग मार्जिन को प्रभावित किया। चीन की आर्थिक सुस्ती और ओपेक+ के उत्पादन बढ़ोतरी संकेतों ने तेल बाजार को दबाव में डाल दिया। रिलायंस जैसे रिफाइनरी दिग्गज के लिए यह बुरी खबर है।
घरेलू मोर्चे पर जियो प्लेटफॉर्म्स में प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। रिलायंस रिटेल के सेल्स में सुस्ती और पेट्रोकेमिकल सेक्टर में कमजोर मांग ने निवेशकों का भरोसा डगमगाया। विश्लेषकों का कहना है कि स्टॉक का वैल्यूएशन अब अधिक लग रहा है।
मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी का डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो मजबूत है, लेकिन एनर्जी साइकिल पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है। ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स जैसे जामनगर गीगा कॉम्प्लेक्स भविष्य की उम्मीद जगाते हैं।
निवेशक अब तिमाही नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। क्या यह अस्थायी सुधार है या लंबी गिरावट की शुरुआत? बाजार की नजरें रिलायंस पर टिकी हैं।