
दक्षिण भारतीय सिनेमा के आकाश में रिबेल स्टार के नाम से मशहूर दिवंगत अभिनेता कृष्णम राजू का स्थान अनोखा है। पांच दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने 180 से ज्यादा फिल्मों में विद्रोही और दमदार किरदार निभाए, जो दर्शकों के दिलों पर छा गए। सामाजिक, रोमांटिक, पौराणिक और ऐतिहासिक फिल्मों में उनकी अदाकारी ने उन्हें अमर बना दिया।
20 जनवरी 1940 को आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले के मोगाल्तुरु गांव में जन्मे कृष्णम राजू ने 1966 में ‘चिलाका गोरिंका’ से डेब्यू किया, जो नंदी अवॉर्ड से नवाजी गई। शुरुआत में हीरो-विलेन दोनों रोल निभाए, लेकिन जल्द ही तेलुगु सिनेमा में विद्रोही नायक के रूप में स्थापित हो गए। ‘अमरा दीपम’, ‘सीता रामुलु’, ‘कटकताला रुद्रैया’, ‘भक्त कन्नप्पा’ और ‘तंद्रा पपरायुडु’ जैसी फिल्में उनकी पहचान बनीं। ‘तंद्रा पपरायुडु’ के लिए 1986 में फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड और दो नंदी पुरस्कार मिले। 2006 में फिल्मफेयर साउथ लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित हुए।
अपने बैनर ‘गोपी कृष्णा मूवीज’ से उन्होंने प्रोडक्शन में भी सफलता पाई, खासकर धार्मिक फिल्मों से। सुपरस्टार प्रभास के चाचा होने के नाते ‘राधे श्याम’ में अंतिम बार नजर आए।
राजनीति में भी उन्होंने कमाल दिखाया। 1992 में कांग्रेस से नरसापुरम लोकसभा सीट पर हारे, लेकिन 1999 में बीजेपी जॉइन कर जीत हासिल की और 1999-2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। कृष्णम राजू का जीवन सिनेमा और राजनीति का अनोखा संगम है।