
देश की विद्युत वितरण कंपनियां लंबे समय के घाटे से उबरकर वित्त वर्ष 2025 में 2,700 करोड़ रुपये से अधिक का शानदार लाभ दर्ज करने में सफल रहीं। यह उपलब्धि बिजली क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई है, जहां पहले भारी कर्ज और नुकसान ने इन्हें जकड़े हुए था।
वित्तीय आंकड़ों से पता चलता है कि लागत नियंत्रण, बेहतर बिल वसूली और सरकारी योजनाओं ने इस परिवर्तन को संभव बनाया। उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) और रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) ने नई पूंजी उपलब्ध कराई और संचालन में अनुशासन लाया। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की डिस्कॉम ने प्रमुख भूमिका निभाई, जहां स्मार्ट मीटरिंग से एटीएंडसी नुकसान में भारी कमी आई।
यह लाभ न केवल कंपनियों की बैलेंस शीट को मजबूत करता है, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाता है। अब ग्रिड आधुनिकीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और क्षमता विस्तार के लिए निवेश संभव हो गया है। हालांकि, ईंधन लागत वृद्धि और सतत सुधारों की चुनौतियां बरकरार हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह लाभकारी दौर उपभोक्ताओं के लिए सस्ती और विश्वसनीय बिजली सुनिश्चित करेगा। सरकार की ऊर्जा सुरक्षा पर नजर के साथ, डिस्कॉम अब भारत की विकास गाथा का मजबूत आधार बन रही हैं।