
नई दिल्ली में सोमवार को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुलाकात हुई, जिसमें पोलैंड के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोर्स्की ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ विचारों का आदान-प्रदान किया। सिकोर्स्की ने अमेरिका का नाम लिए बिना टैरिफ के जरिए भारत को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने की नीति को पूरी तरह गलत ठहराया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से भारत पर रूस से तेल आयात रोकने का दबाव टैरिफ के जरिए बढ़ाया जा रहा है।
तीन दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंचे सिकोर्स्की ने पहले जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शिरकत की। वहां उन्होंने इस वैश्विक सांस्कृतिक आयोजन की तारीफ की। जयशंकर से बातचीत में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार आतंकवाद से निपटने की आवश्यकता पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि पोलैंड को आगजनी हमलों और सरकारी आतंकवाद का सामना करना पड़ा है।
टैरिफ दबाव पर सिकोर्स्की ने कहा, ‘टैरिफ के माध्यम से चुनिंदा निशाना साधना पूरी तरह गलत है। यूरोप में हम इसकी मार झेल चुके हैं। इससे वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल मच सकती है। हम चाहते हैं कि भारत यूरोप से जुड़ा रहे। आपका यूरोप भर में दूतावास खोलना यूरोपीय संघ के साथ गंभीरता दर्शाता है।’
जयशंकर ने जवाब दिया, ‘हां, चुनिंदा निशाना सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं। इसके अन्य तरीके भी हैं, जिन पर चर्चा करेंगे।’ जयपुर में पत्नी के साथ मौजूद सिकोर्स्की ने रूस-यूक्रेन संकट, पोलैंड की भूमिका और बदलती दुनिया में यूरोप के अनुकूलन पर विस्तार से चर्चा की।
नवतेज सरना के साथ संवाद में उन्होंने यूरोप के राजनीतिक, ऐतिहासिक और मानवीय बदलावों का जिक्र किया। पिछले महीने नई दिल्ली में आयोजित 11वें विदेश कार्यालय परामर्श में दोनों देशों ने रक्षा, सुरक्षा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और एआई में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
यह मुलाकात भारत-पोलैंड संबंधों को नई गति देगी, खासकर वैश्विक व्यापारिक दबावों के दौर में। सिकोर्स्की का समर्थन भारत की बहुपक्षीय नीति को मजबूती प्रदान करता है।