
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओजेके) में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। चिकित्सकों ने गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी से हड़ताल शुरू करने की चेतावनी जारी की है। लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा और संसाधनों की भारी कमी ने क्षेत्र के अस्पतालों को जीवित कब्रिस्तान में बदल दिया है।
मुजफ्फराबाद, मीरपुर और कोटली जैसे प्रमुख जिलों के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर बिना दवा-उपकरण के मरीजों का इलाज करने को मजबूर हैं। वेतन के कई-कई महीनों का बकाया, बिजली-पानी की कटौती और भ्रष्टाचार ने हालात को और बदतर बना दिया है। पीओजेके डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. अहमद खान ने कहा, ‘हम बिना बुनियादी सुविधाओं के मरीजों का इलाज नहीं कर सकते।’
क्षेत्र में ट्यूबरकुलोसिस, डायबिटीज और प्रसव संबंधी दवाओं की भारी कालाबाजी हो रही है। दूरदराज के इलाकों में सड़कें अवरुद्ध होने से दवाओं का परिवहन असंभव है। नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में भारी उछाल आया है। स्थानीय निवासी फातिमा बीबी ने दर्द भरी आवाज में कहा, ‘हमारे बच्चे लापरवाही की भेंट चढ़ रहे हैं।’
इस हड़ताल की चेतावनी भारत के गणतंत्र दिवस के समय आना महत्त्वपूर्ण है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पाकिस्तान की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। दशकों से विवादित क्षेत्र का स्वास्थ्य बजट अपर्याप्त रहा है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने बार-बार संकट की ओर ध्यान आकर्षित किया, लेकिन पाक प्रशासन सुधारों से मुकरता रहा।
डॉक्टरों की मांगों में बकाया वेतन का भुगतान, नई भर्तियां और दवाओं की तत्काल खरीद शामिल है। जनवरी की आखिरी तारीख नजदीक आते ही अस्पताल प्रबंधन न्यूनतम सेवाओं के लिए तैयारियां कर रहे हैं। सर्दी में श्वसन रोगों का प्रकोप बढ़ने से स्थिति और गंभीर हो गई है। यदि हड़ताल हुई तो मानवीय आपदा अपरिहार्य है।