
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज स्पष्ट किया कि कोयला भारत के विकसित राष्ट्र बनने के सपने ‘विकसित भारत 2047’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा। ऊर्जा क्षेत्र के एक प्रमुख कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ते हुए भी कोयला हमारी ऊर्जा सुरक्षा का आधार बना रहेगा।
उन्होंने भारत की नवीकरणीय ऊर्जा में अभूतपूर्व प्रगति का जिक्र किया, लेकिन विश्वसनीय बेसलोड पावर की अनिवार्यता पर जोर दिया। ‘कोयला केवल ईंधन नहीं, बल्कि हमारी औद्योगिक प्रगति और ऊर्जा स्थिरता की रीढ़ है,’ मोदी ने कहा। कोयला क्षेत्र ने लाखों घरों को रोशन किया और अर्थव्यवस्था को गति दी।
वैश्विक स्तर पर जीवाश्म ईंधन चरणबद्ध करने की बहस के बीच पीएम मोदी ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की वकालत की। उन्होंने क्लीन कोल तकनीकों, कार्बन कैप्चर और कोयला संयंत्रों के आधुनिकीकरण की योजनाएं बताईं, जो पर्यावरणीय प्रभाव को कम करेंगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की ऊर्जा मांग का 50 प्रतिशत से अधिक कोयला पूरा करता है। शहरीकरण और विनिर्माण से बढ़ती मांग को देखते हुए मोदी ने प्रदूषण नियंत्रण और दक्षता सुधार पर केंद्रित रोडमैप पेश किया।
यह दृष्टिकोण 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य से जुड़ता है। पीएम ने पेरिस समझौते का पालन करते हुए 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता का वादा किया। उद्योग जगत ने इस स्पष्टता का स्वागत किया, जो विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए मॉडल बनेगा।