
पाकिस्तान में महिलाओं के लिए एक बड़ा झटका, जहां सैनिटरी पैड पर 40 प्रतिशत टैक्स लगाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। ताजा रिपोर्ट में इस नीति की पोल खुल गई है, जो महिलाओं की सेहत और गरिमा के खिलाफ खड़ी नजर आ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह भारी कर निम्न आय वर्ग की महिलाओं पर बोझ बन रहा है। ग्रामीण इलाकों में 80 प्रतिशत महिलाओं को साफ-सफाई के उत्पादों की पहुंच नहीं, और इस टैक्स के कारण स्थिति और खराब हो रही है। इससे किशोरियां स्कूल छोड़ने को मजबूर हो रही हैं, जबकि स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सैनिटरी पैड को दवा या अनाज की तरह जरूरी वस्तु मानकर टैक्स मुक्त करना चाहिए। पड़ोसी भारत में जीएसटी को घटाकर 12 प्रतिशत किया गया है, जबकि पाकिस्तान में कोई बदलाव नहीं। आर्थिक दबावों के नाम पर सरकार राजस्व का हवाला दे रही है।
महिला अधिकार संगठन अभियान चला रहे हैं। #टैक्सफ्रीपीरियड्स जैसे हैशटैग वायरल हो रहे हैं। विश्व बैंक जैसी संस्थाएं लैंगिक समानता के लिए सुधारों की मांग कर रही हैं। क्या पाकिस्तान सरकार इस दबाव में झुकेगी?
रिपोर्ट में तत्काल नीति समीक्षा की सिफारिश की गई है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए यह कदम जरूरी है, वरना पीछे रह जाना तय है।