
पाकिस्तान की सरकारी कंपनियां लगातार डूब रही हैं भारी घाटों के जाल में, जिससे देश का आर्थिक संकट चरम पर पहुंच गया है। नई रिपोर्ट ने इस विपदा का खुलासा किया है, जिसमें बताया गया कि ये संस्थाएं साल दर साल अकूत नुकसान झेल रही हैं।
ऊर्जा क्षेत्र से लेकर परिवहन तक, लगभग हर प्रमुख सरकारी कंपनी कर्ज के बोझ तले दबी हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष में सामूहिक घाटा अरबों डॉलर को पार कर गया। राजनीतिक हस्तक्षेप, पुरानी तकनीक और भ्रष्टाचार ने इन्हें कंगाल बना दिया है।
बिजली कंपनियों पर सर्कुलर डेट का बोझ 10 अरब डॉलर से अधिक है, जो उद्योगों और घरों को प्रभावित कर रहा है। राजकोषीय घाटा बढ़ने से कर्ज का अनुपात 90 प्रतिशत से ऊपर चला गया। आईएमएफ जैसे उधारदाता सुधारों की मांग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि निजीकरण और प्रबंधन सुधार जरूरी हैं। सरकार ने कुछ बिक्री योजनाएं घोषित की हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि वादे अक्सर अधूरे रहते हैं। महंगाई 25 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है, विदेशी मुद्रा भंडार घट रहे हैं। क्या पाकिस्तान इस चुनौती से उबर पाएगा?