
पाकिस्तान रेलवे के सामने इन दिनों सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। ट्रेनों के इंजन लगातार खराब हो रहे हैं, जिससे लाखों यात्रियों का सफर बीच में ही रुक जा रहा है। कराची से लाहौर और पेशावर से क्वेटा तक सभी प्रमुख रूट प्रभावित हो चुके हैं।
इस समस्या की जड़ में है लंबे समय से चली आ रही रखरखाव की कमी। पाकिस्तान रेलवे पर 500 अरब रुपये से अधिक का कर्ज चढ़ चुका है, जिसके कारण इंजनों की मरम्मत और मेंटेनेंस का काम लगभग ठप हो गया है। अधिकांश इंजन 25-30 साल पुराने हो चुके हैं और इनकी सर्विस लाइफ खत्म हो चुकी है।
ईंधन की खराब गुणवत्ता भी बड़ा कारण है। मिलावटी डीजल इंजनों के पुर्जों को तेजी से खराब कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, 40 प्रतिशत से अधिक ईंधन नमूनों में मिलावट पाई गई है। आधुनिक डायग्नोस्टिक सिस्टम के अभाव में खराबी का पहले पता लगाना भी मुश्किल हो गया है।
ट्रेनों पर बोझ बढ़ाना भी इसका एक कारण है। राजस्व बढ़ाने के चक्कर में अधिक भार के साथ ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जिससे इंजनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। खराब ट्रैक और मौसम की मार ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।
यात्रियों में भारी आक्रोश है। स्टेशनों पर धरने और प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। व्यापारिक संगठन भी चेतावनी दे रहे हैं कि मालगाड़ियों में देरी से अर्थव्यवस्था को अरबों का नुकसान हो रहा है।
सरकार ने इंजन आयात और स्पेयर पार्ट्स की खरीद के लिए विशेष फंड जारी करने की घोषणा की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बिना व्यापक सुधार के यह अस्थायी उपाय ही साबित होंगे। रेलवे प्रणाली को पटरी पर लाने के लिए कटिबद्ध प्रयास जरूरी हैं।