
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पिछले साल डेंगू और मलेरिया ने व्यापक तबाही मचाई। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इन बीमारियों से 103 लोगों की जान चली गई, जिसमें कराची में सबसे अधिक मामले दर्ज हुए।
मानसून के दौरान भारी बारिश ने मच्छरों के लिए पनाहगाह बना दी। सिंध में डेंगू के 5,000 से ज्यादा और मलेरिया के 10,000 से अधिक केस सामने आए। अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ और संसाधनों की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
कराची के ईस्ट और साउथ जिलों में हालात सबसे खराब रहे। घनी आबादी, खराब सफाई और जलभराव ने बीमारियों का प्रसार तेज कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर फॉगिंग और जागरूकता अभियान न चलाए जाने से नुकसान बढ़ा।
प्रदेश सरकार ने इस साल बड़े पैमाने पर लार्विसाइड छिड़काव और जन जागरूकता कार्यक्रम शुरू करने का वादा किया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी बाढ़ और कचरा प्रबंधन जैसे मूल मुद्दों का समाधान न हुआ तो समस्या बनी रहेगी।
यह घटना सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर देती है। जलवायु परिवर्तन के दौर में फेडरल और प्रांतीय स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं।