
नोएडा के सेक्टर-150 में निर्माण स्थल पर एक इंजीनियर की दर्दनाक मौत ने प्राधिकरण और बिल्डरों की लापरवाही को बेनकाब कर दिया है। दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से सनसनी फैल गई है। इन कंपनियों पर नोएडा प्राधिकरण का करीब 3000 करोड़ रुपये बकाया है, फिर भी सुरक्षा के बुनियादी इंतजामों की अनदेखी की गई।
हादसे वाली साइट पर न सुरक्षा बैरिकेड्स थे, न चेतावनी बोर्ड। इसी घोर लापरवाही से इंजीनियर की जान गई। 2014 में लोटस ग्रीन को स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट के लिए अलॉट हुई जमीन का दुरुपयोग कर इसे टुकड़ों में बेच दिया गया, जिससे सरकारी योजनाएं चूर-चूर हो गईं।
सीबीआई और ईडी जांच में जुटे हैं कि इस घोटाले में अधिकारियों और बिल्डरों की क्या साजिश थी। प्राधिकरण पर सवाल उठ रहे हैं कि बकाया न वसूलने और निगरानी न करने से यह हादसा हुआ।
यह मामला रियल एस्टेट क्षेत्र में सख्ती की मांग करता है। समय रहते कार्रवाई होती तो शायद यह सुलगता सवाल न उठता। जांच से बड़े खुलासे की उम्मीद है।