
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री ने घोषणा की है कि चार नई श्रम संहिताओं से खदान श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। खनन क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि ये सुधार खतरनाक स्थितियों में कार्यरत लाखों मजदूरों की चिंताओं को दूर करेंगे।
वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति से संबंधित ये चार संहिताएं 29 पुरानी कानूनों को एकीकृत करती हैं। खदान मजदूरों के लिए ईएसआईसी और ईपीएफओ का कवरेज अनिवार्य होगा, जिसमें स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और मातृत्व लाभ शामिल हैं। ‘ये संहिताएं मजदूरों की रक्षा कवच हैं,’ मंत्री ने जोर दिया।
सरकार का लक्ष्य 2025 तक 40 करोड़ असंगठित श्रमिकों को इन योजनाओं से जोड़ना है। खनन क्षेत्र में प्रवासी मजदूरों के लिए पोर्टेबल हेल्थ कार्ड और डिजिटल पोर्टल विकसित किए जा रहे हैं। राज्य सरकारों और खनन कंपनियों के सहयोग से जागरूकता शिविर लगाए जाएंगे।
उद्योगपतियों ने स्वागत किया है, लेकिन यूनियनों ने तेजी से अमल और सख्त दंड की मांग की है। खनन दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सुरक्षा अधिकारीयों का प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। भारत की आर्थिक प्रगति के इंजन खनन क्षेत्र को मजबूत बनाने में ये संहिताएं मील का पत्थर साबित होंगी।