
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव हृदय और दिमाग दोनों को कमजोर कर रहा है। लेकिन योग की अनमोल कला में नाड़ी शोधन एक वरदान है। यह वैकल्पिक नासिका श्वास विधि नाड़ियों को शुद्ध कर तंत्रिका तंत्र को संतुलित करती है।
नाड़ी शोधन इड़ा और पिंगला नाड़ियों के माध्यम से शरीर की ऊर्जा धाराओं को सक्रिय करता है। इससे रक्तचाप नियंत्रित होता है, कोर्टिसोल हार्मोन घटता है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। हृदय रोगों से सुरक्षा मिलती है।
मस्तिष्क के लिए यह चमत्कारी है। मस्तिष्क के दोनों गोलार्धों का संतुलन बनाता है, स्मृति तेज करता है और चिंता दूर भगाता है। नियमित अभ्यास से एकाग्रता और भावनात्मक स्थिरता प्राप्त होती है।
सही विधि: सुखासन में बैठें। दाहिने अंगूठे से दाहिनी नासिका बंद कर बाईं से 4 सेकंड श्वास लें। दोनों बंद कर कुंभक 4 सेकंड। दाहिनी से 6 सेकंड छोड़ें। 10 चक्र करें।
सावधानियां: उच्च रक्तचाप, सर्जरी के बाद या श्वास समस्या में चिकित्सक सलाह लें। खाली पेट, शांत स्थान पर करें। चक्कर आने पर रुकें। महिलाएं मासिक धर्म में न करें।
नाड़ी शोधन को दैनिक जीवन में अपनाएं। यह योग की अमूल्य निधि है जो आधुनिक विज्ञान से भी प्रमाणित है। स्वस्थ हृदय-दिमाग के लिए अभी शुरू करें।