
भारत की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए समुद्री विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण साबित होंगे। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने हालिया संबोधन में इसकी रूपरेखा पेश की। उन्होंने कहा कि 7,500 किलोमीटर लंबे समुद्री तट और 22 लाख वर्ग किलोमीटर के विशेष आर्थिक क्षेत्र से अपार संभावनाएं हैं।
समुद्री बायोटेक से दवाइयां, जैव ईंधन और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री तैयार होंगी। सिंह ने गहन समुद्र अन्वेषण और शैवाल-आधारित ऊर्जा पर जोर दिया। नीली अर्थव्यवस्था पहल से हजारों नौकरियां सृजित होंगी।
सरकार रिसर्च हब और कौशल विकास पर भारी निवेश कर रही है। जलीय कृषि, मरीन फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्र जीडीपी में अरबों जोड़ेंगे। पर्यावरण संरक्षण में प्लास्टिक विघटन और कार्बन अवशोषण में योगदान देंगे ये तकनीकें।
मंत्री ने सार्वजनिक-निजी साझेदारी पर भरोसा जताया। तटीय इलाकों में शिक्षा संस्थान विशेष कोर्स शुरू कर रहे हैं। सागरमाला परियोजना का विस्तार और तटीय आर्थिक क्षेत्र स्थापना की योजना है।
पायलट प्रोजेक्ट सफल साबित हो रहे हैं। मछली प्रोटीन उत्पादन और पोषण सप्लीमेंट्स में प्रगति हो रही। जितेंद्र सिंह का मानना है कि समुद्र भारत को सतत विकास की राह दिखाएगा। यह नीली क्रांति आत्मनिर्भर भारत का आधार बनेगी।