
कोच्चि। केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को सबरीमला मंदिर के गर्भगृह से कथित सोने की चोरी के मामले में सख्त लहजे में टिप्पणी की। अदालत ने इसे देवस्वम संपत्तियों की सुनियोजित लूट करार दिया। डिवीजन बेंच ने निरीक्षण रिपोर्टों को गंभीर बताते हुए संदेह जताया कि मंदिर की संपदा की रक्षा करने वाले ही इस अपराध के पीछे हो सकते हैं।
सन्निधानम में सोने के प्लेटों से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई में कोर्ट ने सोने के कार्यों में बड़े स्तर पर छेड़छाड़ के संकेत पकड़े। इसमें सोने से मढ़े दरवाजों के पैनल शामिल हैं। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र की प्रारंभिक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि मूल प्लेटें बदल दी गई लगती हैं।
यह वैज्ञानिक रूप से साबित हो कि मौजूदा प्लेटें पुरानी हैं या नई, बेंच ने जोर दिया। एसआईटी को 20 जनवरी को दोबारा जांच का आदेश दिया गया। दरवाजों के पैनल, अन्य सोने जड़े ढांचों की सटीक नापजांच की इजाजत दी। पुराने दरवाजों की भी पड़ताल होगी।
प्रत्येक प्लेट की आयु-गुणवत्ता का वैज्ञानिक आकलन जरूरी। वीएसएससी अधिकारियों के विस्तृत बयान दर्ज होंगे, क्योंकि रिपोर्ट तकनीकी है। जरूरत पड़े तो एसआईटी अन्य विशेषज्ञों की मदद ले सकती है। अपराध की प्रक्रिया वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है, लेकिन जांच प्रभावित न हो, इसलिए तकनीकी ब्यौरा गुप्त रखा।
रिकॉर्ड से साफ है कि यह संगठित साजिश है, साधारण चोरी नहीं। संपदा रक्षकों पर संलिप्तता का गहरा शक। एसआईटी ने बताया, 13 आरोपी हिरासत में, और गिरफ्तारियां संभव। पिघले सोने का पता लगाने, बैंक खाते फ्रीज किए। अगली सुनवाई 9 फरवरी को।