
आयुर्वेद की गोद में पला कालमेघ (एंड्रोग्राफिस पैनिकुलाटा) एक ऐसा जड़ी-बूटी है जो रक्त को शुद्ध करने से लेकर हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को घटाने तक अनेक लाभ प्रदान करता है। प्राचीन काल से चिकित्सकों द्वारा सराहा जाने वाला यह कड़वा पौधा आज भी आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
कालमेघ लीवर को सक्रिय बनाकर शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है। इससे खून साफ होता है, त्वचा चमकदार बनती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। हृदय स्वास्थ्य के लिए यह चमत्कारी है। इसमें मौजूद एंड्रोग्रेफोलाइड नामक यौगिक धमनियों में सूजन कम करते हैं, खराब कोलेस्ट्रॉल घटाते हैं और प्लाक जमा होने से रोकते हैं।
हालिया शोधों से पता चला है कि नियमित सेवन से हृदयाघात और स्ट्रोक का खतरा 20-30 प्रतिशत तक कम हो सकता है। संक्रमण के मौसम में कालमेघ की चाय या कैप्सूल विशेष रूप से उपयोगी हैं।
फिर भी, बिना सावधानी के सेवन से बचें। गर्भवती महिलाएं, निम्न रक्तचाप वाले व्यक्ति या ब्लड थिनर दवाएं लेने वाले डॉक्टर से परामर्श लें। अधिक मात्रा से पेट दर्द या उल्टी हो सकती है। शुरुआत आधा चम्मच पाउडर से करें और शरीर की प्रतिक्रिया देखें।
संतुलित आहार और व्यायाम के साथ कालमेघ का उपयोग हृदय को मजबूत बनाएगा। यह प्रकृति का उपहार है, जिसे बुद्धिमानी से अपनाएं।