
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि समुद्री विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे, पर्यावरण की रक्षा करेंगे और लाखों रोजगार सृजन करेंगे। एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने भारत के 7,500 किलोमीटर लंबे समुद्री तट और 22 लाख वर्ग किलोमीटर के विशेष आर्थिक क्षेत्र की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
दीप ओशन मिशन जैसी परियोजनाओं के तहत गहरे समुद्र से दुर्लभ खनिज, जैव ईंधन और दवाओं का दोहन किया जाएगा। सिंह ने बताया कि समुद्री शैवाल की खेती और एक्वाकल्चर से 2030 तक तटीय इलाकों में 1 करोड़ से अधिक नौकरियां पैदा होंगी। ‘नीली अर्थव्यवस्था मछली पकड़ने तक सीमित नहीं, बल्कि ट्रिलियन डॉलर का अवसर है,’ उन्होंने जोर देकर कहा।
पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने महासागरीय अम्लीकरण और प्लास्टिक प्रदूषण से लड़ने के सतत उपायों का उल्लेख किया। चेन्नई और कोच्चि में बायोटेक हब्स जीन-एडिटेड समुद्री प्रजातियों पर काम करेंगे। जापान और अमेरिका के साथ सहयोग से सबसी रोबोटिक्स आएगा।
आत्मनिर्भर भारत के अनुरूप यह रोडमैप भारत को समुद्री महाशक्ति बनाएगा। सिंह ने आह्वान किया, ‘विज्ञान और नवाचार से समुद्र में गोता लगाएं।’