
पूर्वी चीन सागर के विवादित जलक्षेत्र में चीन की गैस खोज गतिविधियों ने जापान को भड़का दिया है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी जहाजों ने उस क्षेत्र में सर्वेक्षण शुरू किया है जो जापान अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) का हिस्सा मानता है। इस पर टोक्यो ने कड़ा कूटनीतिक विरोध जताया है।
दशकों पुराना यह विवाद दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच तनाव का कारण बना हुआ है। जापान का कहना है कि चीन के एकतरफा कदम अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन करते हैं। विदेश मंत्रालय ने चीनी राजदूत को तलब कर गंभीर चिंता व्यक्त की।
समुद्र तल में अरबों डॉलर के प्राकृतिक गैस भंडार का लालच दोनों देशों को आकर्षित कर रहा है। पहले भी मछली पकड़ने के जहाजों, तेल प्लेटफार्मों और सैन्य गश्तों को लेकर टकराव हो चुके हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि संसाधनों पर कब्जे की होड़ बड़ा संघर्ष भड़का सकती है।
जापान ने तत्काल कार्रवाई बंद करने और संयुक्त विकास पर बातचीत की मांग की है। वैश्विक नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हैं, क्योंकि यहां का कोई भी गलत कदम पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। शांति बनाए रखने के लिए कूटनीति ही एकमात्र रास्ता लगता है।