
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और लक्जमबर्ग के बीच फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा अंतरिक्ष क्षेत्रों में गहन सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया है। एक महत्वपूर्ण बैठक में उन्होंने कहा कि दोनों देश अधिक उत्पादक तरीकों से साझेदारी कर सकते हैं।
भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और लक्जमबर्ग की वैश्विक वित्तीय शक्ति दोनों को प्राकृतिक साझेदार बनाती है। जयशंकर ने फिनटेक में संयुक्त नवाचार, एआई में अनुसंधान और स्पेस में निवेश के अवसरों का उल्लेख किया।
लक्जमबर्ग की स्पेस लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञता इसरो की सैटेलाइट तकनीक से मेल खाती है। एआई क्षेत्र में मशीन लर्निंग के वित्तीय अनुप्रयोगों पर सहयोग क्रांतिकारी साबित हो सकता है। फिनटेक सीमापार भुगतान को सरल बनाएगा।
द्विपक्षीय संबंध मजबूत हो रहे हैं। हालिया समझौतों से व्यापार बढ़ा है और लक्जमबर्ग भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप का द्वार बन रहा है। जयशंकर ने व्यवसायों से इन क्षेत्रों का भरपूर उपयोग करने को कहा।
वैश्विक चुनौतियों के दौर में यह साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभदायक होगी। जयशंकर ने आशावादी निष्कर्ष देते हुए भारत-लक्जमबर्ग सहयोग के नए युग की भविष्यवाणी की।