
श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से गुरुवार शाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पीएसएलवी-सी62 रॉकेट के जरिए अन्वेषा सैटेलाइट को सफलतापूर्वक कक्षीय कक्षा में स्थापित कर दिया। यह लॉन्च इसरो की विश्वसनीयता और तकनीकी क्षमता का एक और जीवंत प्रमाण है।
लगभग 44 मीटर ऊंचे और 320 टन वजनी इस रॉकेट ने ठीक 6:15 बजे उड़ान भरी। चारों चरणों ने बिल्कुल प्लान अनुसार काम किया और अन्वेषा सैटेलाइट को निचली पृथ्वी कक्षा में सटीक रूप से तैनात कर दिया। नियंत्रण कक्ष में वैज्ञानिकों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई।
लगभग 100 किलोग्राम वजनी अन्वेषा एक प्रायोगिक सैटेलाइट है जो नई तकनीकों का परीक्षण करेगी। इसमें उच्च रिजॉल्यूशन इमेजिंग कैमरा, विकिरण प्रतिरोधी इलेक्ट्रॉनिक्स और पुन: उपयोग योग्य रॉकेट प्रणाली के पुर्जे शामिल हैं। यह गगनयान जैसे भविष्य के मिशनों के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।
इसरो के चेयरमैन एस. सोमनाथ ने इसे ‘पूर्ण सफलता’ करार देते हुए कहा कि पीएसएलवी का 62वां मिशन बेदाग रहा। अन्वेषा आपदा प्रबंधन, कृषि निगरानी और शहरी नियोजन में योगदान देगा। यह भारत की अंतरिक्ष स्वावलंबन की दिशा में बड़ा कदम है।
हाल ही में चंद्रयान-3 की सफलता के बाद यह लॉन्च इसरो के लिए गर्व का विषय है। वैश्विक स्तर पर पीएसएलवी की कम लागत अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। अन्वेषा के प्रयोगों से प्रणोदन और कक्षा नियंत्रण में नई जानकारियां मिलेंगी।
इसरो 2024 में और अधिक उड़ानों की योजना बना रहा है, जिसमें जीएसएलवी और मानव अंतरिक्ष उड़ान परीक्षण शामिल हैं। यह मिशन न केवल तकनीकी जीत है बल्कि लाखों भारतीयों के लिए प्रेरणा स्रोत भी। अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूते भारत का सफर जारी है।