
इंदौर शहर में दूषित पानी से उपजी स्वास्थ्य आपदा के बाद राहत की खबरें आ रही हैं। अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अब केवल 54 मरीजों का ही इलाज चल रहा है, जबकि चरम स्थिति में सैकड़ों लोग प्रभावित हुए थे।
यह संकट तब भड़का जब विभिन्न इलाकों में निवासियों ने उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायतें कीं। जांच में नगर निगम के जल स्रोतों में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से प्रभावित लाइनों को बंद कर टैंकरों से पानी वितरण शुरू किया। सुपर क्लोरिनेशन अभियान चलाया गया और जन जागरूकता के लिए घर-घर अभियान चलाया।
स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. संजय दीक्षित ने बताया, ‘तीन दिनों से डिस्चार्ज दर नए भर्ती से अधिक है। जल परीक्षण रिपोर्ट्स सकारात्मक हैं।’ 80 प्रतिशत सैंपल अब सुरक्षित पाए गए हैं। फिर भी विशेषज्ञ सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
54 मरीजों में बच्चे और वृद्ध शामिल हैं, जिन्हें जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। सामाजिक संगठनों ने जल आपूर्ति प्रणाली की मजबूती की मांग की है। पाइपलाइन अपग्रेड और नियमित जांच जरूरी बताई जा रही है।
यह घटना शहरी जल प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर करती है। निवासियों से उबला पानी इस्तेमाल करने और स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई है। प्रशासन प्रभावितों को मुआवजा देने का आश्वासन दे चुका है। इंदौर धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।