
भारत का स्मार्टफोन उद्योग एक अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंच गया है। 2025 में निर्यात 30 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर को छू लिया, जो उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का सीधा परिणाम है। यह उपलब्धि देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई है।
2020 में शुरू हुई पीएलआई योजना ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा था। एप्पल, सैमसंग और फॉक्सकॉन जैसी कंपनियों को आकर्षित कर इसने निवेश की बाढ़ ला दी। परिणामस्वरूप, आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हुई, कुशल श्रमिक तैयार हुए और नीतिगत सुधारों से दक्षता बढ़ी।
इस वर्ष निर्यात में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। अमेरिका, यूरोप और मध्य पूर्व प्रमुख बाजार बने। भारत में बने आईफोन अब वैश्विक उत्पादन का 25 प्रतिशत हैं, जबकि अन्य कंपनियां भी चीन से स्थानांतरित हो रही हैं।
इस उछाल से 5 लाख से अधिक नौकरियां पैदा हुईं। डिस्प्ले पैनल और बैटरी जैसे सहायक क्षेत्र फले-फूले। अर्थशास्त्री इसे ‘मेक इन इंडिया’ का आदर्श मॉडल मानते हैं, जो 2028 तक 50 अरब डॉलर निर्यात का लक्ष्य रखता है।
हालांकि, कच्चे माल आयात और बुनियादी ढांचे की चुनौतियां बरकरार हैं। नीतिनिर्माताओं के सुधारों से ये हल होंगी। यह रिकॉर्ड आत्मनिर्भर भारत की नई सुबह का संकेत है, जहां सस्ते दामों पर अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध होगी।