
भारत की ऊर्जा क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल हुई है। वित्त वर्ष 2026 में अधिकतम बिजली मांग 242.49 गीगावाट (जीडब्ल्यू) तक पहुंचने का अनुमान है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर इतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर आ गया है। पिछले दशक में भारत ने अपनी बिजली उत्पादन क्षमता में भारी वृद्धि की है। कोयला संयंत्रों से लेकर विशाल नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं तक, ग्रिड में हजारों मेगावाट जोड़े गए हैं। सौर और पवन ऊर्जा क्षमता में विस्फोटक वृद्धि हुई है, जिसमें सौर स्थापनाएं हाल ही में 100 जीडब्ल्यू को पार कर चुकी हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, आपूर्ति ने 98 प्रतिशत से अधिक आवश्यकताओं को पूरा करना शुरू कर दिया है, जो ऊर्जा सुरक्षा की ओर एक बड़ा कदम है।