
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को पशुधन क्षेत्र लगातार मजबूती दे रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में हर साल औसतन 12.77 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी हो रही है। यह विकास ग्रामीण भारत की चेहरा बदल रहा है।
दुग्ध उत्पादन में भारत विश्व नेता बना हुआ है। बेहतर नस्लों, चारे और सरकारी योजनाओं से दूध उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। किसानों को अच्छी कीमतें और बाजार उपलब्ध हो रहे हैं।
मुर्गी पालन, मछली पालन और बकरी पालन में भी तेजी आई है। ये क्षेत्र लाखों लोगों को रोजगार दे रहे हैं, खासकर महिलाओं को। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिर आय का स्रोत बन गए हैं।
सरकार की भूमिका सराहनीय है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन, पशु बीमा और चारा सब्सिडी जैसी योजनाओं ने जोखिम कम किया है। निर्यात के अवसर बढ़ रहे हैं, जिससे विदेशी मुद्रा आ रही है।
चुनौतियां जैसे चारे की कमी और बीमारियां बनी हुई हैं, लेकिन जलवायु अनुकूल नस्लें और तकनीक समाधान दे रही हैं। फसल आधारित कृषि के जोखिमों से पशुधन सुरक्षा कवच साबित हो रहा है।
भविष्य में यह क्षेत्र किसानों की आय दोगुनी करने में अहम होगा। सतत विकास के साथ भारत की कृषि वैश्विक पटल पर चमकेगी।